#Rushivarji #radhe_krishna #bhakts रसो वै सः परमात्मा रस स्वरूप है इसलिए गोपी भगवान श्री कृष्ण के दर्शन कर नयनों से रसपान करती है।उनकी लीला श्रवण कर कानों से रसपान करती है हाथों से लाला की उपासना,जिव्हा से नाम संकीर्तन का रसपान मन में प्रभु का चिन्तन निरंतर करती है

8:13 AM · May 17, 2022

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Replying to @sushmakatare1
गोपियों की हर क्रिया , मुरारी पादार्पित चित्त वृत्ति है, वो इंद्रियों से परमात्मा को निरंतर पान करती हैं, इस लिए ही तो नारद मुनि भक्ति सूत्र में कहते हैं कि गोपी प्रेम की ध्वजा - यथा ब्रज गोपिकनाम - गोपी की तो नकल भी कल्याणकारी सिद्ध होगी - जय श्री कृष्ण: प्रभो #Rushivarji
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